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Friday, 24 March 2017

बीरबल की खोज

कहानी : बीरबल की खोज



बीरबल बादशाह अकबर के दरबार की शोभा थे। एक बार अकबर की बीरबल से किसी बात पर कहा-सुनी हो गई। अकबर ने क्रोध में आकर उनसे दरबार से चले जाने को कह दिया। बीरबल दरबार से चल दिए। कोई उन्हें पहचान न ले, इसलिए उन्होंने किसान का वेश धारण कर लिया। घूमते-घूमते वे एक गाँव में पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि एक किसान अपने खेत में काम कर रहा था। बीरबल ने उस किसान से पूछा- ''क्या तुम मुझे काम दे सकते हो ?'' किसान दयालु था।

Thursday, 23 March 2017

अमन की चतुराई

कहानी : अमन की चतुराई


अमन अपने दादा जी के साथ रहता था। वह बहुत होनहार और समझदार था। अमन अपना समय बेकार के कामों में न गँवाकर घर के काम-काज में दादा जी की सहायता करता था। अमन के दादा जी की इच्छा थी कि वह कुछ पूँजी अपने पोते के लिए छोड़कर इस दुनिया से विदा लें। अपनी लगन और मेहनत से उन्होंने थोड़ी-थोड़ी बचत करके सोने की कुछ मोहरें इकट्ठी भी कर ली थीं।

Thursday, 16 March 2017

कुँए के भूत

कहानी : कुँए के भूत



 




एक गाँव में एक गरीब आदमी रहता था। गाँव में उसके पास कोई काम नही था। एक दिन उसकी बीबी बोली शहर जाकर कुछ काम करो, यहाँ तो अब कोई उधार देने को भी नही राजी है। आदमी ने कहा कि ठीक है कल मैं शहर जाऊँगा, मेरे लिए सुबह ही रास्ते के लिए रोटी बना देना। उसकी बीबी ने सुबह तीन रोटी बनाई और उसको देकर कहा जब भूख लगे तो खा लेना। वह आदमी चलते- चलते दोपहर को जंगल में पहुंचा। उसने वहां एक कुँए के किनारे आराम किया। उसे भूख भी लग गयी थी। उसने कुँए से पानी निकाला फ़िर रोटी को देख कर बोला कि " एक खाऊ कि दो खाऊ कि तीनो खा जाऊ "। उस कुँए में तीन भूत रहते थे। उन भूतों ने सोचा कि यह आदमी तो बहुत खतरनाक है और हम सबको खा जाएगा। वे भूत डर गए और उन्होंने उस आदमी से कहा हमें मत खाओ हम तुम्हे अच्छे- अच्छे उपहार देंगे। आदमी समझ गया कि ये भूत उस से डर गए है तो उसने कहा नही मुझे भूख लगी है मेरी भूख मिटाओ नही तो मैं तुम सब को खा जाऊँगा। एक भूत बोला कि मेरे पास एक जादुई लोटा है उस से जो खाना मांगोगे तुम्हे मिल जाएगा। उस आदमी ने कहा तो दो मुझे लोटा, मुझे बहुत भूख लगी है। उस भूत ने उसे लोटा दे दिया। उस आदमी ने उस लोटे से खूब पकवान निकल कर खाए। फ़िर उसने बाकी दोनों भूतो से कहा कि तुम भी कुछ उपहार दोगे कि तुम दोनों को कच्चा चबा जाऊं। उन भूतो ने उसे एक डंडा और रस्सी दिया तथा कहा कि इस से तुम चाहे कुछ भी बाँध लो और चाहे जिसे जितने डंडे मारने को कहो यह उसको मारेगा। 

Wednesday, 15 March 2017

परी की दयालुता

कहानी : परी की दयालुता



किसी नगर में एक अमीर आदमी रहता था। उसके पास बहुत पैसा था। शहर भर में उसका बहुत नाम था, किन्तु इतना सब होते हुए भी उसमें घमंड नहीं था। वह दीन-दुखियों की सहायता किया करता था। उसकी हवेली में मांगने वालों की हमेशा भीड़ लगी रहती थी, पर दूसरों को ख़ुशी देने वाला वह अमीर हमेशा उदास-उदास दिखाई पड़ता था। वह ही नहीं, उसकी पत्नी भी हमेशा चिंता में डूबी रहती थी। इसका कारण था उनके घर में संतान का न होना। दोनों पति-पत्नी यही सोचते रहते थे कि उनके बाद इस सारी धन-दौलत का क्या होगा ?

उनकी हवेली के साथ एक बहुत खूबसूरत बगीचा भी था। उस बगीचे में संगमरमर की बनी हुई कई आदमकद मूर्तियां खड़ी थीं। अमीर की पत्नी को सलीके से जिंदगी बिताने का बेहद शौक था, इसलिए उसने बगीचे में परियों की मूर्तियों के पास अपने बैठने के लिए खूबसूरत जगह बनवाई हुई थी। यहां अनेक रंग-बिरंगे फूल खिले थे। अमीर की पत्नी माली से फूलों की मालाएं बनवाती और स्वयं आकर परियों के गले में पहनाया करती थी। एक दिन अमीर की पत्नी संतान की चिंता में बहुत ही उदास थी।